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17 October 2026
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IBC की धारा 7 में डिफॉल्ट का सारांश परीक्षण और Information Utility रिकॉर्ड का साक्ष्य-मूल्य

IBC की धारा 7 के admission चरण पर परीक्षण सारांश है और डिफॉल्ट दस्तावेजी सामग्री के आधार पर संभावनाओं के संतुलन से स्थापित किया जा सकता है। डिफॉल्ट का घटित होना और बकाया…
CourtThe Supreme Court of India
CaseDEEPAK RAHEJA VS. OMKARA ASSETS RECONSTRUCTION PRIVATE LTD. Case Number: C.A. No. 12195/2025; साथ में Diary No. 58001/2025 से उत्पन्न connected Civil Appeal
Bench / Coramमाननीय न्यायमूर्ति Dipankar Datta और माननीय न्यायमूर्ति Augustine George Masih
Citation2026 INSC 1134 Decision
Key Points / एक नज़र में
  • IBC की धारा 7 के admission चरण पर परीक्षण सारांश है और डिफॉल्ट दस्तावेजी सामग्री के आधार पर संभावनाओं के संतुलन से स्थापित किया जा सकता है।
  • डिफॉल्ट का घटित होना और बकाया ऋण की सटीक मात्रा तय करना अलग प्रश्न हैं; हर लेखा-प्रविष्टि का अंतिम मिलान admission की पूर्वशर्त नहीं है।
  • Information Utility का authenticated Record of Default उच्च साक्ष्य-मूल्य रखता है और प्रथमदृष्टया पर्याप्त है; उसे हटाने के लिए स्पष्ट, ठोस, विश्वसनीय और प्रभावी सामग्री चाहिए।

विस्तृत विश्लेषण

Legal Analysis • Vakeel Sahab

IBC की धारा 7 के admission चरण पर परीक्षण सारांश है और डिफॉल्ट दस्तावेजी सामग्री के आधार पर संभावनाओं के संतुलन से स्थापित किया जा सकता है। डिफॉल्ट का घटित होना और बकाया ऋण की सटीक मात्रा तय करना अलग प्रश्न हैं; हर लेखा-प्रविष्टि का अंतिम मिलान admission की पूर्वशर्त नहीं है। Information Utility का authenticated Record of Default उच्च साक्ष्य-मूल्य रखता है और प्रथमदृष्टया पर्याप्त है; उसे हटाने के लिए स्पष्ट, ठोस, विश्वसनीय और प्रभावी सामग्री चाहिए।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: DEEPAK RAHEJA VS. OMKARA ASSETS RECONSTRUCTION PRIVATE LTD.

Case Number: C.A. No. 12195/2025; साथ में Diary No. 58001/2025 से उत्पन्न connected Civil Appeal

Case-number verification: निर्णय-पाठ में connected appeal का Civil Appeal number रिक्त है; इसलिए उसका कोई नंबर नहीं जोड़ा गया।

Bench: माननीय न्यायमूर्ति Dipankar Datta और माननीय न्यायमूर्ति Augustine George Masih

Neutral Citation: 2026 INSC 1134

Decision Date: 2026-10-15

मामला क्या था?

Piramal समूह के ऋणों और ECLGS सुविधाओं के संबंध में Omkara Assets Reconstruction Private Ltd. ने GSTAAD Hotels Pvt. Ltd. और Neo Capricorn Plaza Pvt. Ltd. के विरुद्ध IBC की धारा 7 के आवेदन दायर किए। NCLT ने दोनों आवेदन स्वीकार किए; NCLAT ने उन आदेशों को बरकरार रखा। अपीलकर्ताओं ने Cash Management Agreement, Debt Service Reserve Account, ऋण की गणना और कंपनियों की लाभप्रदता के आधार पर डिफॉल्ट को चुनौती दी।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या IBC की धारा 7 के तहत डिफॉल्ट सिद्ध करने के लिए Adjudicating Authority को पूरे ऋण-खाते का अंतिम और विस्तृत मिलान करना आवश्यक है; और Information Utility के authenticated Record of Default तथा अन्य दस्तावेजों को कितना साक्ष्य-मूल्य दिया जाना चाहिए?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अपीलें खारिज कीं और दोनों कॉरपोरेट देनदारों के विरुद्ध CIRP जारी रखने का निर्देश बरकरार रखा। धारा 7 में परीक्षण सारांश है: दस्तावेजी सामग्री के आधार पर संभावनाओं के संतुलन पर डिफॉल्ट का प्रथमदृष्टया अस्तित्व दिखाना पर्याप्त है; admission के चरण पर देय राशि का अंतिम, रुपये-दर-रुपये निर्धारण आवश्यक नहीं।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

न्यायालय ने डिफॉल्ट को ऐसी ऐतिहासिक घटना माना जो देय भुगतान न होने पर घटित होती है, जबकि बकाया राशि ब्याज, शुल्क और भुगतान के कारण बदल सकती है। इसलिए डिफॉल्ट के अस्तित्व और ऋण की अंतिम मात्रा के प्रश्न अलग हैं। Information Utility द्वारा जारी Record of Default को उच्च साक्ष्य-मूल्य वाला और अपने आप में प्रथमदृष्टया पर्याप्त माना गया; इसे केवल स्पष्ट, ठोस, विश्वसनीय और प्रभावी सामग्री से हटाया जा सकता है, न कि मात्र इनकार या लेखा-गणना पर असहमति से। अन्य दस्तावेज—जैसे ऋण अनुबंध, खाते के विवरण, देयता की स्वीकृतियां और समकालीन पत्राचार—सामूहिक रूप से डिफॉल्ट सिद्ध कर सकते हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि सकारात्मक EBITDA या लाभप्रदता अपने आप ऋण चुकाने की क्षमता नहीं दर्शाती; IBC का ट्रिगर डिफॉल्ट है, अंतिम या balance-sheet insolvency नहीं।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • IBC की धारा 7 के admission चरण पर परीक्षण सारांश है और डिफॉल्ट दस्तावेजी सामग्री के आधार पर संभावनाओं के संतुलन से स्थापित किया जा सकता है।
  • डिफॉल्ट का घटित होना और बकाया ऋण की सटीक मात्रा तय करना अलग प्रश्न हैं; हर लेखा-प्रविष्टि का अंतिम मिलान admission की पूर्वशर्त नहीं है।
  • Information Utility का authenticated Record of Default उच्च साक्ष्य-मूल्य रखता है और प्रथमदृष्टया पर्याप्त है; उसे हटाने के लिए स्पष्ट, ठोस, विश्वसनीय और प्रभावी सामग्री चाहिए।
  • अन्य प्रासंगिक दस्तावेजों का सामूहिक मूल्यांकन डिफॉल्ट स्थापित कर सकता है, भले कोई एक दस्तावेज Information Utility रिकॉर्ड के समान प्रभाव न रखता हो।
  • सकारात्मक EBITDA या लाभप्रदता डिफॉल्ट को समाप्त नहीं करती; न्यायालय ने ऋण-सेवा क्षमता के संदर्भ में DSCR को अधिक प्रासंगिक माना।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

धारा 7 के मामलों में केवल ब्याज, शुल्क या खाते की गणना को लेकर विवाद होने से admission स्वतः नहीं रुकेगा, यदि दस्तावेजों से आवश्यक सीमा से ऊपर का डिफॉल्ट प्रथमदृष्टया स्थापित हो। authenticated Information Utility रिकॉर्ड को समय पर चुनौती न देने वाले देनदार के लिए बाद में उसे नकारना कठिन होगा; उसे ठोस और विश्वसनीय प्रत्युत्तर सामग्री प्रस्तुत करनी होगी। दावे की विस्तृत जांच और मात्रा का सत्यापन CIRP में किया जा सकता है।

Source check: निर्णय-पाठ में 2026 INSC 1134, C.A. No. 12195/2025 और 15 अक्टूबर 2026 की तारीख दी गई है, जो उपलब्ध metadata से मेल खाते हैं। Judgment text में connected appeal का Civil Appeal number रिक्त है।
Advocate Amardeep Jaiswal
About the Author / लेखक परिचय

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

Editorial note: यह लेख कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित है। Judgment/official source उपलब्ध होने पर authoritative text के लिए मूल स्रोत को प्राथमिकता दें।
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