अंतिम Reconstruction Scheme में AT-1 बॉन्ड लिखने का प्रावधान न हो, तो सामान्य savings clause से Administrator को वह विशिष्ट शक्ति नहीं मिलती। Master Circular के clause 2.15 के अनुसार, “before reconstitution” का आशय Reconstruction Scheme के प्रभावी होने से पहले है। PONV पर बॉन्ड लिखने या परिवर्तित करने का अधिकार RBI का था; Administrator RBI की नियामकीय शक्ति का स्थानापन्न नहीं था।
Court: The Supreme Court of India
Case Name: YES BANK LIMITED VS. AXIS TRUSTEE SERVICES LIMITED
Case Number: Civil Appeal Nos. 3182/2025, 3183–3192/2025, 3193–3202/2025 और 3203–3212/2025
Bench: माननीय न्यायमूर्ति Dipankar Datta और माननीय न्यायमूर्ति Augustine George Masih
Neutral Citation: 2026 INSC 1132
Decision Date: 2026-10-15
मामला क्या था?
YES BANK ने 2016 और 2017 में क्रमशः ₹3,000 करोड़ और ₹5,415 करोड़ के Basel III-compliant AT-1 बॉन्ड जारी किए थे। मार्च 2020 में बैंक पर moratorium लगाया गया और उसकी Reconstruction Scheme तैयार की गई। Draft Scheme में AT-1 बॉन्ड पूरी तरह लिखने का प्रावधान था, लेकिन 13 मार्च 2020 को अधिसूचित अंतिम Scheme में यह प्रावधान नहीं रखा गया। अगले दिन Administrator ने दोनों बॉन्ड पूरी तरह लिख दिए। बॉन्डधारकों की चुनौती पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह कार्रवाई रद्द कर दी; अपीलें माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष थीं।
मुख्य कानूनी प्रश्न
क्या YES BANK के Administrator को, अंतिम Reconstruction Scheme में AT-1 बॉन्ड लिखने का प्रावधान न होने के बावजूद, Master Circular और Information Memoranda के आधार पर बॉन्ड लिखने का अधिकार था; और क्या वह RBI के लिए निर्धारित Point of Non-Viability (PONV) संबंधी शक्ति का प्रयोग कर सकता था?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अपीलें खारिज कर दी गईं और हाई कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया गया। अंतिम Reconstruction Scheme से AT-1 बॉन्ड लिखने का प्रावधान हटाए जाने के बाद Administrator को उन्हें लिखने का विशिष्ट अधिकार नहीं था। Master Circular के तहत PONV पर बॉन्ड लिखने या परिवर्तित करने का निर्णय RBI के अधिकार में था; Administrator उस नियामकीय शक्ति को अपने अधिकार के रूप में प्रयोग नहीं कर सकता था। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि clause 2.15 में “before reconstitution” का अर्थ Reconstruction Scheme के प्रभावी होने से पहले है, न कि Scheme के कार्यान्वयन के दौरान किसी भी समय।
न्यायालय की प्रमुख reasoning
न्यायालय ने Draft और अंतिम Reconstruction Scheme की तुलना, RBI के आंतरिक नोट तथा हितधारकों की आपत्तियों पर विचार किया। इनसे यह निष्कर्ष निकाला कि अंतिम Scheme में बॉन्ड लिखने का प्रावधान न होना सचेत निर्णय था; सामान्य savings clause से Administrator को वह विशिष्ट शक्ति नहीं मिल सकती थी। Master Circular और Information Memoranda ने Pre-Specified Trigger तथा PONV के लिए अलग व्यवस्था की थी। Pre-Specified Trigger पर बैंक के पास विकल्प था, जबकि PONV संबंधी निर्णय और कार्रवाई RBI के अधिकार-क्षेत्र में थे। Section 36ACA के तहत Administrator बोर्ड का स्थान लेकर बैंक के कार्य चला सकता था, लेकिन RBI की नियामकीय भूमिका नहीं अपना सकता था। कार्रवाई की वैधता बाद में हुए घटनाक्रम के बजाय 14 मार्च 2020 को मौजूद तथ्यों और कानून के आधार पर परखी गई।
निर्णय के मुख्य बिंदु
- अंतिम Reconstruction Scheme में AT-1 बॉन्ड लिखने का प्रावधान न हो, तो सामान्य savings clause से Administrator को वह विशिष्ट शक्ति नहीं मिलती।
- Master Circular के clause 2.15 के अनुसार, “before reconstitution” का आशय Reconstruction Scheme के प्रभावी होने से पहले है।
- PONV पर बॉन्ड लिखने या परिवर्तित करने का अधिकार RBI का था; Administrator RBI की नियामकीय शक्ति का स्थानापन्न नहीं था।
- Pre-Specified Trigger और PONV अलग ट्रिगर हैं; इनके तहत निर्णय लेने का अधिकार भी अलग हो सकता है।
- प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता उस तारीख के तथ्यों और लागू कानून से तय होगी, न कि बाद के सुधार या परिस्थितियों से।
इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव
बैंक पुनर्निर्माण और AT-1 बॉन्ड विवादों में नियामकीय शक्ति, बॉन्ड की शर्तों और अधिसूचित Scheme के बीच स्पष्ट अंतर करना होगा। Administrator केवल बोर्ड के कार्य करने के अधिकार के आधार पर RBI के लिए आरक्षित PONV निर्णय नहीं ले सकता। निर्णय में यह भी कहा गया कि बॉन्डों पर वार्षिक coupon का भुगतान अपीलों के परिणाम से अप्रभावित रहेगा और Information Memoranda के अनुसार किया जाना चाहिए।