Section 19(2) में सामग्री भेजने की कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है। “Immediately” का अर्थ इस निर्णय में 24 घंटे की अनिवार्य समय-सीमा नहीं माना गया; आवश्यक देरी और प्रशासनिक परिस्थितियाँ देखी जा सकती हैं। Section 19(2) के तहत पाँच दिन की देरी मात्र से गिरफ्तारी स्वतः अवैध नहीं हुई।
Court: The Supreme Court of India
Case Name: SANJAY SUREKA @SANJAY KUMAR SUREKA VS. DIRECTORATE OF ENFORCEMENT
Case Number: Criminal Appeal No. 4904 of 2026 (SLP (Crl.) No. 10994 of 2026 से उत्पन्न)
Bench: माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और माननीय न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली
Neutral Citation: 2026 INSC 1124
Decision Date: 2026-10-14
मामला क्या था?
अपीलकर्ता को PMLA के तहत 18.12.2024 को गिरफ्तार किया गया था। आरोपित धनशोधन मामले में कथित अपराध की राशि ₹6,210.72 करोड़ बताई गई। अपीलकर्ता ने गिरफ्तारी के लगभग 20 महीने बाद जमानत मांगी। ED ने अपीलकर्ता के विरुद्ध जाँच पूरी होने की बात कही थी, जबकि अभियोजन शिकायतों और बड़ी मात्रा में दस्तावेजों के कारण मुकदमे के शीघ्र शुरू या पूरा होने की संभावना नहीं दिख रही थी। अपीलकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि Section 19(2) के तहत सामग्री भेजने में पाँच दिन की देरी से गिरफ्तारी अवैध हुई।
मुख्य कानूनी प्रश्न
क्या PMLA की Section 19(2) के तहत गिरफ्तारी से संबंधित आदेश और सामग्री भेजने में पाँच दिन की देरी गिरफ्तारी को अवैध बनाती है; और क्या Section 45 की जमानत संबंधी कठोर शर्तों के बावजूद लंबी हिरासत तथा निकट भविष्य में मुकदमे के पूरा न होने की आशंका पर जमानत दी जा सकती है?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायालय ने माना कि Section 19(2) में सामग्री भेजने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है और पाँच दिन की देरी, अपने आप में, गिरफ्तारी को अवैध नहीं बनाती। फिर भी, अपीलकर्ता की लंबी हिरासत, उसके विरुद्ध जाँच पूरी होने और मुकदमे के निकट भविष्य में पूरा न हो पाने की स्थिति में, उसे जमानत दी गई। न्यायालय ने कहा कि Section 45 की शर्तें Article 21 के संवैधानिक संरक्षण को निष्प्रभावी नहीं कर सकतीं।
न्यायालय की प्रमुख reasoning
Section 19(2) में प्रयुक्त “immediately” का अर्थ अनिवार्य रूप से 24 घंटे या कोई तय अवधि नहीं है; सामग्री को यथाशीघ्र भेजना आवश्यक है और आवश्यक प्रशासनिक समय अपने आप में गैर-अनुपालन नहीं बनता। दूसरी ओर, अपीलकर्ता 20 महीने से अधिक समय से हिरासत में था, उसके विरुद्ध जाँच पूरी थी और मुकदमे में भारी मात्रा में दस्तावेजों तथा अनेक गवाहों की जाँच अपेक्षित थी। न्यायालय के अनुसार, मुकदमे के लंबित रहने तक हिरासत जारी रखना इस परिस्थिति में उचित नहीं था; प्रक्रिया को स्वयं दंड नहीं बनने देना चाहिए।
निर्णय के मुख्य बिंदु
- Section 19(2) में सामग्री भेजने की कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है।
- “Immediately” का अर्थ इस निर्णय में 24 घंटे की अनिवार्य समय-सीमा नहीं माना गया; आवश्यक देरी और प्रशासनिक परिस्थितियाँ देखी जा सकती हैं।
- Section 19(2) के तहत पाँच दिन की देरी मात्र से गिरफ्तारी स्वतः अवैध नहीं हुई।
- PMLA की Section 45 की जमानत शर्तें Article 21 के संवैधानिक संरक्षण पर हावी नहीं हो सकतीं।
- लंबी हिरासत, आरोपी के विरुद्ध जाँच पूरी होना और मुकदमे में संभावित लंबा समय जमानत के पक्ष में प्रासंगिक थे।
इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव
PMLA मामलों में Section 19(2) के तहत सामग्री भेजने में हुई देरी को केवल दिनों की संख्या से गिरफ्तारी अमान्य करने वाला आधार नहीं माना जाएगा; देरी और आवश्यक समय की परिस्थितियाँ प्रासंगिक होंगी। साथ ही, लंबी हिरासत, जाँच पूरी होना और मुकदमे में लंबा समय लगने की संभावना जमानत के लिए Article 21 पर आधारित महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं, भले ही Section 45 की कठोर शर्तें लागू हों। इस मामले में जमानत पासपोर्ट जमा करने, देश से बाहर जाने के लिए ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति लेने और साक्षियों को प्रभावित न करने की शर्तों पर दी गई।
Original Judgment / Source: The Supreme Court of India — Official Judgment PDF