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14 October 2026
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IBC की धारा 62 के तहत अपील की समय-सीमा: प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन से पहले की देरी भी गिनी जाएगी

IBC की धारा 62 के तहत अपील की मूल परिसीमा 45 दिन है; पर्याप्त कारण होने पर अधिकतम 15 दिन की देरी माफ की जा सकती है। प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख अपने-आप परिसीमा क…
CourtThe Supreme Court of India
CaseTHE ASSISTANT COMMISSIONER OF CENTRAL TAX CGST DIVISION VS. SREENIVASA RAO RAVINUTHALA Case Number: Civil Appeal No. 7882 of 2023
Bench / Coramमाननीय न्यायमूर्ति S.V.N. Bhatti और माननीय न्यायमूर्ति N. V. Anjaria
Citation2026 INSC 1121 Decision
Key Points / एक नज़र में
  • IBC की धारा 62 के तहत अपील की मूल परिसीमा 45 दिन है; पर्याप्त कारण होने पर अधिकतम 15 दिन की देरी माफ की जा सकती है।
  • प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख अपने-आप परिसीमा की नई शुरुआत नहीं बनती।
  • धारा 12(2) के तहत प्रति के लिए आवेदन करने से लेकर प्रति तैयार होने तक का आवश्यक समय घटाया जा सकता है।

विस्तृत विश्लेषण

Legal Analysis • Vakeel Sahab

IBC की धारा 62 के तहत अपील की मूल परिसीमा 45 दिन है; पर्याप्त कारण होने पर अधिकतम 15 दिन की देरी माफ की जा सकती है। प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख अपने-आप परिसीमा की नई शुरुआत नहीं बनती। धारा 12(2) के तहत प्रति के लिए आवेदन करने से लेकर प्रति तैयार होने तक का आवश्यक समय घटाया जा सकता है।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: THE ASSISTANT COMMISSIONER OF CENTRAL TAX CGST DIVISION VS. SREENIVASA RAO RAVINUTHALA

Case Number: Civil Appeal No. 7882 of 2023

Bench: माननीय न्यायमूर्ति S.V.N. Bhatti और माननीय न्यायमूर्ति N. V. Anjaria

Neutral Citation: 2026 INSC 1121

Decision Date: 2026-10-14

मामला क्या था?

NCLAT ने 02.08.2023 को Resolution Plan को कायम रखा। Revenue ने 06.09.2023 को आदेश की प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन किया और 11.10.2023 को प्रति प्राप्त की। उसने 21.11.2023 को IBC की धारा 62 के तहत माननीय सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। Respondent ने अपील को 45 दिन की मूल अवधि और अधिकतम 15 दिन की विलंब-माफी अवधि से बाहर बताते हुए परिसीमा पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या IBC की धारा 62 के तहत माननीय सुप्रीम कोर्ट में अपील की 45 दिन की समय-सीमा आदेश के उच्चारण से शुरू होती है, या प्रमाणित प्रति प्राप्त होने पर; और प्रमाणित प्रति पाने में लगे समय में से कौन-सी अवधि Limitation Act की धारा 12 के तहत घटाई जा सकती है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने माना कि धारा 62 के तहत परिसीमा NCLAT द्वारा आदेश के उच्चारण की तारीख से शुरू होती है। Limitation Act की धारा 12(2) के तहत प्रमाणित प्रति का आवेदन करने के बाद उसे तैयार करने में लगा आवश्यक समय घटाया जा सकता है, लेकिन आवेदन करने से पहले की निष्क्रियता नहीं। 45 दिन की अवधि और अधिकतम 15 दिन की विलंब-माफी अवधि मिलाकर 60 दिन की बाहरी सीमा है। अपील इस सीमा से बाहर थी और परिसीमा के आधार पर खारिज की गई।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

न्यायालय ने IBC की समयबद्ध अपील-व्यवस्था और Limitation Act की धारा 12 को साथ पढ़ा। NCLAT Rules के अनुसार खुले न्यायालय में आदेश का उच्चारण उसकी घोषणा है। इसलिए परिसीमा प्रति मिलने तक अनिश्चितकाल के लिए रुकी नहीं रहती। धारा 12(2) केवल प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन के बाद प्रति तैयार होने में लगा आवश्यक समय बाहर करती है; धारा 12 का Explanation आवेदन से पहले की देरी को बाहर करने से रोकता है। इस मामले में प्रति के लिए आवेदन से पहले 35 दिन और प्रति मिलने के बाद अपील दायर करने तक 41 दिन गिने गए—कुल 76 दिन, जो 60 दिन की अधिकतम सीमा से अधिक थे।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • IBC की धारा 62 के तहत अपील की मूल परिसीमा 45 दिन है; पर्याप्त कारण होने पर अधिकतम 15 दिन की देरी माफ की जा सकती है।
  • प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख अपने-आप परिसीमा की नई शुरुआत नहीं बनती।
  • धारा 12(2) के तहत प्रति के लिए आवेदन करने से लेकर प्रति तैयार होने तक का आवश्यक समय घटाया जा सकता है।
  • प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन करने से पहले की निष्क्रियता परिसीमा में गिनी जाएगी।
  • इस मामले में कुल 76 गिने जाने योग्य दिन होने के कारण अपील 60 दिन की बाहरी सीमा से 16 दिन आगे थी।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

IBC के तहत माननीय सुप्रीम कोर्ट में अपील करने वाले पक्ष को NCLAT का आदेश उच्चारित होने के बाद शीघ्र प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन करना और प्रति मिलने पर शेष परिसीमा अवधि में अपील दायर करना चाहिए। आवेदन करने से पहले प्रतीक्षा की गई अवधि को प्रति तैयार होने में लगे समय के रूप में घटाया नहीं जा सकता।

Original Judgment / Source: The Supreme Court of India — Official Judgment PDF

Advocate Amardeep Jaiswal
About the Author / लेखक परिचय

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

Editorial note: यह लेख कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित है। Judgment/official source उपलब्ध होने पर authoritative text के लिए मूल स्रोत को प्राथमिकता दें।
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