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14 October 2026
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व्यावसायिक पाठ्यक्रम की फीस सामान्यतः प्रवेश से पहले तय हो; बीच में बदलाव केवल असाधारण परिस्थितियों में: माननीय सुप्रीम कोर्ट

फीस निर्धारण में छात्रों की वित्तीय निश्चितता, संस्थान की वैध वित्तीय जरूरतों और नियामक हित का संतुलन आवश्यक है। फीस निर्धारण समितियों को संस्थागत दक्षता, विशेषज्ञता और न…
CourtThe Supreme Court of India
Bench / Coramमाननीय न्यायमूर्ति Pamidighantam Sri Narasimha और माननीय न्यायमूर्ति Alok Aradhe
Citation2026 INSC 1120 Decision
Key Points / एक नज़र में
  • फीस निर्धारण में छात्रों की वित्तीय निश्चितता, संस्थान की वैध वित्तीय जरूरतों और नियामक हित का संतुलन आवश्यक है।
  • फीस निर्धारण समितियों को संस्थागत दक्षता, विशेषज्ञता और निरंतरता के साथ काम करना चाहिए।
  • फीस संशोधन AICTE Regulations, 1994 के तहत समिति की सिफारिश और निर्धारित व्यय-आकलन प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए; सामान्यतः संशोधनों के बीच कम-से-कम तीन वर्ष का अंतराल आवश्यक है।

विस्तृत विश्लेषण

Legal Analysis • Vakeel Sahab

फीस निर्धारण में छात्रों की वित्तीय निश्चितता, संस्थान की वैध वित्तीय जरूरतों और नियामक हित का संतुलन आवश्यक है। फीस निर्धारण समितियों को संस्थागत दक्षता, विशेषज्ञता और निरंतरता के साथ काम करना चाहिए। फीस संशोधन AICTE Regulations, 1994 के तहत समिति की सिफारिश और निर्धारित व्यय-आकलन प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए; सामान्यतः संशोधनों के बीच कम-से-कम तीन वर्ष का अंतराल आवश्यक है।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: DR. B.C. ROY ENGINEERING COLLEGE VS. THE STATE OF WEST BENGAL

Case Number: SLP (C) No. 13237 of 2026 तथा संबद्ध SLP (C) Nos. 13690-13691, 16753, 14913-14914, 15617-15618 और 16677 of 2026 से उत्पन्न Civil Appeals; Civil Appeal numbers judgment text में रिक्त हैं

Case-number verification: विश्वसनीय मेटाडेटा में C.A. No. 13769/2026 दिया गया है, लेकिन निर्णय में Civil Appeal number रिक्त है और केवल SLP संख्या दी गई है। इसलिए लेख में मेटाडेटा वाली अपील संख्या नहीं अपनाई गई।

Bench: माननीय न्यायमूर्ति Pamidighantam Sri Narasimha और माननीय न्यायमूर्ति Alok Aradhe

Neutral Citation: 2026 INSC 1120

Decision Date: 2026-10-14

मामला क्या था?

पश्चिम बंगाल में 2023-24 सत्र के लिए B.Tech. छात्रों के प्रवेश और दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर 2023 को self-financing व्यावसायिक कॉलेजों के लिए संशोधित फीस व्यवस्था अधिसूचित की। Dr. B.C. Roy Engineering College ने दिसंबर 2023 में 2023-27 बैच की फीस बढ़ाई और development fee भी लगाई, जिससे छात्रों पर फीस का बोझ बढ़ा। छात्रों ने बढ़ोतरी को चुनौती दी। कलकत्ता हाई कोर्ट की Division Bench ने संशोधित फीस को उन छात्रों पर लागू करने से रोका जिनका दाखिला 16 अक्टूबर 2023 से पहले पूरा हो चुका था और अतिरिक्त वसूली लौटाने या समायोजित करने का निर्देश दिया।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या self-financing higher educational institutions व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होने और छात्रों के प्रवेश के बाद, उसी पाठ्यक्रम के दौरान फीस बढ़ा सकते हैं; और फीस निर्धारण में fee fixation committees तथा राज्य के नियामक तंत्र की क्या भूमिका है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फीस निर्धारण का नियामक तंत्र सामान्यतः पूरे पाठ्यक्रम की फीस छात्र के प्रवेश से पहले अधिसूचित करे, ताकि फीस-दायित्व के बारे में निश्चितता रहे। पाठ्यक्रम के दौरान फीस में बदलाव केवल असाधारण परिस्थितियों—जैसे व्यय में अप्रत्याशित वृद्धि—में किया जा सकता है। कोर्ट ने फीस निर्धारण समितियों को सतत और प्रभावी संस्थागत निकाय के रूप में कार्य करने तथा हाई कोर्ट द्वारा उनकी कार्यकुशलता, विशेषज्ञता और ईमानदारी की न्यायिक समीक्षा करने की आवश्यकता बताई। हाई कोर्ट के उन अंतिम निर्देशों को बरकरार रखा गया जिनके अनुसार 16 अक्टूबर 2023 से पहले दाखिला पूरा कर चुके छात्रों पर संशोधित फीस लागू नहीं होगी और अतिरिक्त राशि लौटाई या समायोजित की जाएगी।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

कोर्ट ने छात्रों और परिवारों की उचित फीस तथा वित्तीय निश्चितता की जरूरत, self-financing संस्थानों के संसाधन और विकास की जरूरत, और राज्य के नियामक हित—इन तीनों के संतुलन पर जोर दिया। AICTE Regulations, 1994 के Regulation 7(1), 7(4) और 7(5) को साथ पढ़ते हुए कोर्ट ने कहा कि फीस संशोधन समिति की सिफारिश पर, कम-से-कम तीन वर्ष के अंतराल के बाद और संस्थान के अनुमानित व्यय के आधार पर होना चाहिए। समिति को लागतों का आकलन समय रहते करना चाहिए और सक्षम प्राधिकारी को प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले निर्णय लेना चाहिए। कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि कॉलेज का कदम अधिसूचना को retrospective प्रभाव देने वाला था या prospectus के आधार पर equity और estoppel के सिद्धांत कॉलेज के विरुद्ध लागू होते हैं; हालांकि हाई कोर्ट के अंतिम फीस-संबंधी निर्देश कायम रखे।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • फीस निर्धारण में छात्रों की वित्तीय निश्चितता, संस्थान की वैध वित्तीय जरूरतों और नियामक हित का संतुलन आवश्यक है।
  • फीस निर्धारण समितियों को संस्थागत दक्षता, विशेषज्ञता और निरंतरता के साथ काम करना चाहिए।
  • फीस संशोधन AICTE Regulations, 1994 के तहत समिति की सिफारिश और निर्धारित व्यय-आकलन प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए; सामान्यतः संशोधनों के बीच कम-से-कम तीन वर्ष का अंतराल आवश्यक है।
  • पाठ्यक्रम की फीस यथासंभव पूरे पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश से पहले तय और अधिसूचित की जानी चाहिए।
  • पाठ्यक्रम के दौरान फीस में बदलाव केवल असाधारण परिस्थितियों, जैसे अप्रत्याशित व्यय-वृद्धि, में स्वीकार्य है।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को सामान्यतः पूरे पाठ्यक्रम की फीस की जानकारी प्रवेश से पहले मिलनी चाहिए। कॉलेज और नियामक प्राधिकारी फीस में बदलाव को नियमित या स्वतःसिद्ध प्रक्रिया नहीं मान सकते; मध्य-पाठ्यक्रम बदलाव के लिए असाधारण कारण आवश्यक होंगे। फीस निर्धारण समितियों और सरकार को संशोधन समय पर पूरा करना होगा, जबकि हाई कोर्ट उनकी संस्थागत कार्यक्षमता की समीक्षा कर सकते हैं। इस मामले में 16 अक्टूबर 2023 से पहले प्रवेश पूरा कर चुके छात्रों पर संशोधित फीस लागू नहीं होगी; अतिरिक्त वसूली के संबंध में हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा।

Source check: निर्णय पर स्वयं “REPORTABLE” अंकित है।

Original Judgment / Source: The Supreme Court of India — Official Judgment PDF

Advocate Amardeep Jaiswal
About the Author / लेखक परिचय

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

Editorial note: यह लेख कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित है। Judgment/official source उपलब्ध होने पर authoritative text के लिए मूल स्रोत को प्राथमिकता दें।
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