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14 October 2026
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अवमानना कार्यवाही में एकल न्यायाधीश के आदेश के विरुद्ध Special Appeal: माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया अपील कब उपलब्ध हो सकती है

Section 19(1), Contempt of Courts Act, 1971 के तहत अपील contempt के लिए दंड देने वाले आदेश के विरुद्ध उपलब्ध होती है। Contempt कार्यवाही में मूल विवाद के merits तय करने य…
CourtThe Supreme Court of India
CaseSANJAY PRASAD VS. MADHUSUDAN DWIVEDI Case Number: Civil Appeal No. of 2026 arising out of SLP (C) No. 33319 of 2026
Bench / Coramमाननीय न्यायमूर्ति Dipankar Datta और माननीय न्यायमूर्ति Sheel Nagu
Citation2026 INSC 1128 Decision
Key Points / एक नज़र में
  • Section 19(1), Contempt of Courts Act, 1971 के तहत अपील contempt के लिए दंड देने वाले आदेश के विरुद्ध उपलब्ध होती है।
  • Contempt कार्यवाही में मूल विवाद के merits तय करने या पक्षकारों के ठोस अधिकार प्रभावित करने वाला आदेश अलग से intra-court appeal योग्य हो सकता है, यदि संबंधित High Court के नियम इसकी अनुमति द…
  • Civil contempt को केवल इसलिए criminal jurisdiction नहीं माना जाएगा कि उसमें दंड की संभावना है; contempt jurisdiction sui generis है।

विस्तृत विश्लेषण

Legal Analysis • Vakeel Sahab

Section 19(1), Contempt of Courts Act, 1971 के तहत अपील contempt के लिए दंड देने वाले आदेश के विरुद्ध उपलब्ध होती है। Contempt कार्यवाही में मूल विवाद के merits तय करने या पक्षकारों के ठोस अधिकार प्रभावित करने वाला आदेश अलग से intra-court appeal योग्य हो सकता है, यदि संबंधित High Court के नियम इसकी अनुमति दें और आदेश ‘judgment’ का परीक्षण पूरा करे। Civil contempt को केवल इसलिए criminal jurisdiction नहीं माना जाएगा कि उसमें दंड की संभावना है; contempt jurisdiction sui generis है।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: SANJAY PRASAD VS. MADHUSUDAN DWIVEDI

Case Number: Civil Appeal No. of 2026 arising out of SLP (C) No. 33319 of 2026

Case-number verification: निर्णय-पाठ में Civil Appeal संख्या रिक्त है और SLP (C) No. 33319 of 2026 का उल्लेख है। Trusted metadata में C.A. No. 13745/2026 दिया गया है, लेकिन निर्णय-पाठ से इसकी पुष्टि नहीं होती; इसलिए उसे शामिल नहीं किया गया।

Bench: माननीय न्यायमूर्ति Dipankar Datta और माननीय न्यायमूर्ति Sheel Nagu

Neutral Citation: 2026 INSC 1128

Decision Date: 2026-10-14

मामला क्या था?

Allahabad High Court के एकल न्यायाधीश ने लंबित contempt application में कथित अनुपालन-आदेश वाला affidavit अस्वीकार किया और निर्देश दिया कि आदेश का पालन न होने पर संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों; आगे charges तय करने की कार्यवाही भी संभव बताई गई। अपीलकर्ता, जो उच्च न्यायालय में alleged contemnor था, ने इस आदेश को माननीय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर निर्णय नहीं किया, बल्कि यह विचार किया कि क्या आदेश के विरुद्ध हाई कोर्ट में Special Appeal उपलब्ध हो सकती है।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या contempt application पर एकल न्यायाधीश का ऐसा आदेश, जो कथित अवमानना के निर्धारण तक सीमित न रहकर मूल विवाद के गुण-दोष या पक्षकारों के ठोस अधिकारों को प्रभावित करे, उच्च न्यायालय के लागू नियमों के अधीन intra-court Special Appeal में चुनौती योग्य है? साथ ही, क्या civil contempt कार्यवाही को Special Appeal रोकने वाले नियम के लिए ‘criminal jurisdiction’ माना जा सकता है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Allahabad High Court Rules के अधीन contempt application पर एकल न्यायाधीश के ऐसे आदेश के विरुद्ध Special Appeal प्रस्तुत की जा सकती है जो Chunilal Nanda में बताए गए ‘judgment’ के परीक्षण को पूरा करता हो—विशेषकर जब आदेश मूल आदेश के अनुपालन के नाम पर अनुपालन-निर्णय की शुद्धता जांचकर उसे खारिज करे, मूल आदेश से आगे निर्देश दे, या विवादित तथ्य/कानून तय करके पक्षकारों के अधिकारों का अंतिम निर्धारण करे। Civil contempt कार्यवाही sui generis है और उसे केवल संभावित दंड के कारण criminal jurisdiction नहीं कहा जा सकता। Section 19(1) के अंतर्गत अपील अलग से तभी होगी जब contempt के लिए दंड देने वाला आदेश पारित हुआ हो। न्यायालय ने Ram Kishan Fauji के सहीपन पर प्रश्न उचित पीठ को संदर्भित किया; उस निर्णय को इस आदेश से निरस्त नहीं किया।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

न्यायालय ने Midnapore Peoples’ Coop. Bank Ltd. v. Chunilal Nanda के सिद्धांतों के आधार पर contempt में दंडादेश और मूल विवाद के गुण-दोष या ठोस अधिकारों पर दिए गए निर्देशों के बीच अंतर किया। Allahabad High Court Rules का Rule 5 Special Appeal की उपलब्धता नियंत्रित करता है। न्यायालय के अनुसार civil contempt की प्रकृति सामान्य आपराधिक अभियोजन जैसी नहीं है; इसलिए contempt कार्यवाही को यांत्रिक रूप से criminal jurisdiction में रखकर Rule 5 का अपवर्जन लागू नहीं किया जा सकता। साथ ही, तीन-न्यायाधीश पीठ के Ram Kishan Fauji में Article 226 और criminal jurisdiction संबंधी दृष्टिकोण पर न्यायालय ने संवैधानिक तथा access-to-justice संबंधी कारणों से संदर्भ भेजा।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • Section 19(1), Contempt of Courts Act, 1971 के तहत अपील contempt के लिए दंड देने वाले आदेश के विरुद्ध उपलब्ध होती है।
  • Contempt कार्यवाही में मूल विवाद के merits तय करने या पक्षकारों के ठोस अधिकार प्रभावित करने वाला आदेश अलग से intra-court appeal योग्य हो सकता है, यदि संबंधित High Court के नियम इसकी अनुमति दें और आदेश ‘judgment’ का परीक्षण पूरा करे।
  • Civil contempt को केवल इसलिए criminal jurisdiction नहीं माना जाएगा कि उसमें दंड की संभावना है; contempt jurisdiction sui generis है।
  • Allahabad High Court Rule 5 के संदर्भ में, contempt आदेश की प्रकृति और वास्तव में प्रयुक्त न्यायिक अधिकारिता महत्वपूर्ण हैं; केवल आदेश का नाम या कार्यवाही का लेबल निर्णायक नहीं है।
  • Ram Kishan Fauji के सहीपन पर प्रश्न उचित पीठ को संदर्भित किया गया; इस निर्णय ने उस नज़ीर को अंतिम रूप से पलटा नहीं।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

Allahabad High Court में contempt application पर ऐसा एकल-न्यायाधीश आदेश, जो मूल विवाद के merits या ठोस अधिकारों का निर्णय करता हो, लागू नियमों के अधीन Division Bench में Special Appeal के लिए चुनौती योग्य हो सकता है। इस मामले में अपीलकर्ता को दो सप्ताह के भीतर Special Appeal प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई और contempt petition पर दो महीने के लिए रोक लगाई गई। अपील के merits खुले रखे गए।

Source check: निर्णय-पाठ में तिथि 14 अक्टूबर 2026 और neutral citation 2026 INSC 1128 है। निर्णय में अपील संख्या रिक्त है और SLP (C) No. 33319 of 2026 से उत्पन्न बताई गई है; metadata में दिए गए C.A. No. 13745/2026 को निर्णय-पाठ से सत्यापित नहीं किया जा सकता।

Original Judgment / Source: The Supreme Court of India — Official Judgment PDF

Advocate Amardeep Jaiswal
About the Author / लेखक परिचय

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

Editorial note: यह लेख कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित है। Judgment/official source उपलब्ध होने पर authoritative text के लिए मूल स्रोत को प्राथमिकता दें।
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