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08 July 2026
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जब 70% शारीरिक विकलांगता बनी 100% आर्थिक अक्षमता: सुप्रीम कोर्ट का एक ऐतिहासिक फैसला

कानूनी पेशे में, विशेषकर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के मामलों में, अक्सर हम देखते हैं कि अदालतें मेडिकल बोर्ड द्वारा दी गई 'शारीरिक विकलांगता' (Physical Disability)…
Key Points / एक नज़र में
  • कानूनी पेशे में, विशेषकर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के मामलों में, अक्सर हम देखते हैं कि अदालतें मेडिकल बोर्ड द्वारा दी गई 'शारीरिक विकलांगता' (Physical Disability) के प्रतिशत को ही 'आ…
  • लेकिन, हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा M.
  • and Another [2026 INSC 655] में दिया गया निर्णय हम सभी अधिवक्ताओं के लिए एक 'गेम-चेंजर' साबित हो सकता है।

विस्तृत विश्लेषण

Legal Analysis • Vakeel Sahab

कानूनी पेशे में, विशेषकर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के मामलों में, अक्सर हम देखते हैं कि अदालतें मेडिकल बोर्ड द्वारा दी गई 'शारीरिक विकलांगता' (Physical Disability) के प्रतिशत को ही 'आर्थिक नुकसान' (Loss of Earning Capacity) मानकर मुआवजा निर्धारित कर देती हैं।

लेकिन, हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा M. Paramesh vs. VRL Logistics Ltd. and Another [2026 INSC 655] में दिया गया निर्णय हम सभी अधिवक्ताओं के लिए एक 'गेम-चेंजर' साबित हो सकता है। यह निर्णय हमें सिखाता है कि कैसे हम मेडिकल रिपोर्ट की सीमाओं से ऊपर उठकर अपने मुवक्किल के लिए बेहतर न्याय सुनिश्चित कर सकते हैं।मामले का सार: जब 70% शारीरिक विकलांगता बनी 100% आर्थिक अक्षमताइस मामले में, एक राजमिस्त्री (Mason) सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके परिणामस्वरूप उसका दाहिना पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा । सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र में इसे 70% स्थायी विकलांगता प्रमाणित किया गया था । ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय दोनों ने यांत्रिक रूप से इसी 70% को 'आर्थिक नुकसान' का आधार बनाया ।

सर्वोच्च न्यायालय ने इसे चुनौती देते हुए राज कुमार बनाम अजय कुमार (2011) के सिद्धांतों को पुष्ट किया और कहा कि: शारीरिक vs कार्यात्मक: शारीरिक विकलांगता का प्रतिशत, आर्थिक नुकसान के प्रतिशत के समान नहीं होता है ।

पेशा (Avocation) का महत्व

राजमिस्त्री का काम पूर्णतः शारीरिक है। पैर कट जाने के बाद, वह राजमिस्त्री का कार्य करने में पूर्णतः असमर्थ हो चुका है । अतः, भले ही मेडिकल रिपोर्ट 70% कहे, लेकिन उसके पेशे के संदर्भ में यह 100% कार्यात्मक विकलांगता है । अधिवक्ता साथियों के लिए मुख्य लर्निंग पॉइंट्स (Key Takeaways)मेडिकल रिपोर्ट का अंधानुकरण न करें: बतौर अधिवक्ता, हमारा कर्तव्य है कि हम कोर्ट को यह समझाएं कि क्लाइंट का पेशा क्या है और उस विशिष्ट शारीरिक क्षति का उसके पेशे पर क्या प्रभाव पड़ा है।कार्यात्मक अक्षमता पर जोर दें: M. Paramesh के निर्णय का उपयोग करते हुए आप यह तर्क दे सकते हैं कि यदि शारीरिक क्षति ने क्लाइंट की आजीविका के साधन को पूरी तरह खत्म कर दिया है, तो वह 100% आर्थिक अक्षमता है । भविष्य के चिकित्सा व्यय: इस निर्णय में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल एक बार का इलाज काफी नहीं है। कृत्रिम अंग (Prosthesis) के रखरखाव और आजीवन चिकित्सा सहायता के लिए पर्याप्त मुआवजे की मांग करें । कोर्ट ने इस मामले में भविष्य के चिकित्सा व्यय को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख किया है । अपनी दलीलों में इस साइटेशन का उपयोग कैसे करें?जब आप अगली बार अपने केस में बहस करें, तो अपनी ड्राफ्टिंग में इस तरह शामिल करें:"माननीय न्यायालय, M. Paramesh vs. VRL Logistics Ltd. (2026 INSC 655) के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि विकलांगता का प्रतिशत तय करते समय Tribunal को यांत्रिक दृष्टिकोण नहीं अपनाना चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि चोट ने claimant को उसके वर्तमान पेशे के लिए किस हद तक अक्षम कर दिया है। यदि क्षति ने उसके काम करने की क्षमता को समाप्त कर दिया है, तो भले ही शारीरिक विकलांगता कम हो, आर्थिक नुकसान को 100% माना जाना चाहिए।

"निष्कर्ष - M. Paramesh vs. VRL Logistics Ltd. का यह निर्णय उन सभी अधिवक्ताओं के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है जो जमीनी स्तर पर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। याद रखें, एक कुशल अधिवक्ता वही है जो कानून की व्याख्या को मानवता के धरातल पर रखकर पेश करे।

Advocate Amardeep Jaiswal
About the Author / लेखक परिचय

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

Editorial note: यह लेख कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित है। Judgment/official source उपलब्ध होने पर authoritative text के लिए मूल स्रोत को प्राथमिकता दें।
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