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साइबर क्राइम में बैंक अकाउंट पर होल्ड (Freeze) क्यों लगता है? जानें कानूनी धाराएं और अनफ्रीज़ कराने की पूरी प्रक्रिया

साइबर क्राइम में बैंक अकाउंट पर होल्ड (Freeze) क्यों लगता है? जानें कानूनी धाराएं और अनफ्रीज़ कराने की पूरी प्रक्रिया

August 30, 2026

डिजिटल इंडिया के इस दौर में यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग और मोबाइल वॉलेट्स ने लेनदेन को बहुत आसान बना दिया है। लेकिन इसके साथ ही साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) के मामलों में भी भारी वृद्धि हुई है। कई बार ऐसा होता है कि आपका किसी भी फ्रॉड से कोई सीधा लेना-देना नहीं होता, फिर भी अचानक आपके बैंक अकाउंट पर 'Lien' या 'Hold' लग जाता है और आपका अपना ही पैसा ब्लॉक हो जाता है।

यह स्थिति किसी भी व्यक्ति या व्यापारी के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने वाली होती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि साइबर क्राइम के मामलों में बैंक खाते को फ्रीज़ क्यों किया जाता है, इसमें कौन सी कानूनी धाराएं लागू होती हैं, और इसे वापस चालू (Unfreeze) कराने की कानूनी प्रक्रिया क्या है।

बैंक अकाउंट पर होल्ड क्यों लगता है? (The Chain of Transactions)
जब किसी पीड़ित के साथ साइबर फ्रॉड होता है, तो वह National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) या टोल-फ्री नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराता है। शिकायत दर्ज होते ही पुलिस या साइबर सेल उस फ्रॉड के पैसे को ट्रैक (Money Trail) करना शुरू कर देती है।

साइबर अपराधी अक्सर पैसे को छिपाने के लिए उसे कई बैंक खातों में ट्रांसफर करते हैं (जिसे Layering कहा जाता है)। इस प्रक्रिया में, जिस-जिस अकाउंट में वह पैसा जाता है, पुलिस उन सभी अकाउंट्स की पूरी 'चेन' को ब्लॉक या होल्ड करने का निर्देश बैंक को दे देती है।

उदाहरण: यदि आप एक व्यापारी हैं और किसी ने आपसे कोई सामान खरीदा और UPI से पेमेंट किया। अगर वह पैसा किसी साइबर फ्रॉड का था, तो जांच के दौरान आपका अकाउंट भी संदिग्ध मानकर फ्रीज़ कर दिया जाएगा, भले ही आपको इस फ्रॉड की कोई जानकारी न हो। क्रिप्टोकरेंसी (P2P) ट्रेडिंग में भी यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।

साइबर क्राइम और बैंक होल्ड से जुड़ी प्रमुख कानूनी धाराएं
जब कोई साइबर फ्रॉड होता है, तो पुलिस इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) (पूर्व में IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज करती है।

1. इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000 की धाराएं:
Section 66 (कंप्यूटर संबंधी अपराध): यदि कोई व्यक्ति कंप्यूटर या नेटवर्क का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी करता है।

Section 66C (पहचान की चोरी / Identity Theft): किसी अन्य व्यक्ति के पासवर्ड, डिजिटल सिग्नेचर या कार्ड डिटेल्स का गलत इस्तेमाल करना।

Section 66D (कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी): इंटरनेट या कंप्यूटर का इस्तेमाल करके अपनी पहचान छिपाकर किसी के साथ धोखाधड़ी (Cheating by personation) करना। फिशिंग (Phishing) या स्पूफिंग के मामले इसी में आते हैं।

2. भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराएं:
धारा 318 BNS (धोखाधड़ी / Cheating): यह पुरानी IPC की धारा 420 के समतुल्य है। साइबर ठगी में पैसे ऐंठने पर यह धारा लगाई जाती है।

धारा 319 BNS (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी): जब कोई व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी या कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बताकर धोखाधड़ी करता है।

धारा 336 & 338 BNS (फर्जी दस्तावेज़ बनाना): फर्जी KYC या जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खोलकर उनका उपयोग साइबर अपराध में करना।

3. पुलिस को बैंक खाता फ्रीज़ करने का अधिकार:
धारा 106, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS): यह पुरानी CrPC की धारा 102 की जगह लाई गई है। इस धारा के तहत पुलिस अधिकारी को यह विशेष अधिकार प्राप्त है कि वह जांच के दौरान किसी भी ऐसी संपत्ति या बैंक खाते को ज़ब्त (Seize) या होल्ड (Hold) कर सकता है, जिस पर किसी अपराध से जुड़े होने या चोरी की संपत्ति होने का संदेह हो।

अकाउंट होल्ड होने पर क्या करें? (Unfreeze करने की प्रक्रिया)
अगर आपका खाता साइबर सेल के निर्देश पर फ्रीज़ हो गया है, तो आपको निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

चरण 1: बैंक से लिखित जानकारी प्राप्त करें
अपने बैंक मैनेजर से संपर्क करें और खाते पर लगे होल्ड का कारण पूछें। उनसे वह ईमेल या नोटिस मांगें जो साइबर पुलिस ने उन्हें भेजा है। आपको मुख्य रूप से तीन चीजें चाहिए:

NCRP Complaint Number / Acknowledgement Number

फ्रीज़ करने वाले साइबर पुलिस स्टेशन का नाम और राज्य

जांच अधिकारी (Investigating Officer - IO) का नाम, ईमेल और फोन नंबर।

चरण 2: अपनी बेगुनाही के सबूत (Evidence) तैयार करें
अगर आपके खाते में आया पैसा किसी वैध लेनदेन (Legal Transaction) का है, तो उसका पूरा रिकॉर्ड तैयार करें:

व्यापारिक बिल (Invoices) या रसीदें।

व्हाट्सएप या ईमेल पर हुई बातचीत (चैट) के स्क्रीनशॉट।

क्रिप्टोकरेंसी (P2P) ट्रेडिंग का पूरा लेज़र और एग्रीमेंट।

आपका बैंक स्टेटमेंट जो साबित करे कि आपका मुख्य काम वैध है।

चरण 3: साइबर सेल को अपना पक्ष (Representation) भेजें
जांच अधिकारी (IO) को एक विस्तृत ईमेल या पत्र भेजें। इसमें बताएं कि आपने किस सेवा या उत्पाद के बदले वह पैसा प्राप्त किया था और आपका मुख्य आरोपी से कोई संबंध नहीं है। धारा 94 BNSS (पूर्व में 91 CrPC) के तहत नोटिस का जवाब देते हुए अपने सभी दस्तावेज़ पुलिस को सौंपें। यदि IO संतुष्ट होता है, तो वह बैंक को खाता डी-फ्रीज़ करने का निर्देश दे सकता है।

चरण 4: कोर्ट के माध्यम से कानूनी कार्रवाई (Legal Remedies)
कई बार दूसरे राज्य की साइबर पुलिस जवाब नहीं देती या बिना किसी ठोस सबूत के खाते को लंबे समय तक होल्ड रखती है। ऐसी स्थिति में कानूनी सहारा लेना आवश्यक हो जाता है:

मजिस्ट्रेट न्यायालय में आवेदन: आप अपने अधिवक्ता के माध्यम से संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट की अदालत में अपना खाता अनफ्रीज़ करने के लिए आवेदन (Application for release of property) लगा सकते हैं।

हाई कोर्ट में याचिका (Quashing Petition / Writ): यदि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से मनमानी है, या आपका खाता बिना किसी विधिवत प्रक्रिया के महीनों से ब्लॉक है, तो संविधान के अनुच्छेद 226 या धारा 528 BNSS (पूर्व में 482 CrPC) के तहत सीधे हाई कोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है। हाई कोर्ट के पास मनमाने आदेशों को रद्द (Quash) करने और खाते को तुरंत अनफ्रीज़ करने का निर्देश देने की शक्ति होती है।

ध्यान दें: किसी भी अनजान व्यक्ति से पैसे लेते समय सतर्क रहें। यदि आपका खाता ब्लॉक हो गया है, तो घबराकर किसी भी फ्रॉड कॉल (जो खुद को पुलिस बताकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं) के झांसे में न आएं। सही कानूनी प्रक्रिया का पालन करें और आवश्यकता पड़ने पर किसी अनुभवी अधिवक्ता से उचित कानूनी सलाह लें।

लेखक / परामर्शदाता

Amardeep Jaiswal, Advocate High Court of Madhya Pradesh

यदि आप इस विषय पर अधिक जानकारी चाहते हैं या किसी कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो नीचे दिए गए विकल्पों से संपर्क कर सकते हैं।

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Disclaimer: This article is for educational purposes only and should not be considered legal advice.

अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी कानूनी मामले के लिए कृपया उचित परामर्श लें।