क्या आपकी सोशल मीडिया रील आपको बार काउंसिल से निलंबित करवा सकती है?
July 18, 2026
कानूनी पेशा भारत में कोई साधारण पेशा नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली का एक पवित्र स्तंभ है। हाल ही में, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 17 जुलाई 2026 को एक ऐतिहासिक सर्कुलर जारी किया है, जो वकीलों, लॉ छात्रों और इंटर्न के लिए 'डिजिटल आचार संहिता' (Digital Code of Conduct) निर्धारित करता है।
क्या आप जानते हैं कि आपकी सोशल मीडिया पोस्ट आपके करियर को सीधे प्रभावित कर सकती है? यदि आप एक वकील हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए अनिवार्य है। BCI के इस सर्कुलर का सार यहाँ सरल भाषा में समझाया गया है।
⚠️ सर्कुलर का मुख्य उद्देश्य: 'गरिमा बनाम तमाशा'
BCI ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया का उपयोग कानूनी साक्षरता के लिए तो ठीक है, लेकिन अदालत की गरिमा को 'डिजिटल मनोरंजन' में बदलना अब दंडनीय होगा।
📜 नए नियमों के मुख्य बिंदु (BCI के सख्त दिशानिर्देश)
1. अदालत परिसर में वीडियो पर पूर्ण प्रतिबंध:
अदालत परिसर, कॉरिडोर, चैंबर या बार रूम में रील, वीडियो या फोटो शूट करना वर्जित है (जब तक कि विशेष अनुमति न हो)।
अदालत की लाइव-स्ट्रीमिंग को क्लिप करना, उसमें संगीत जोड़ना या उसे एडिट करके सनसनीखेज बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
2. अनिवार्य शपथ पत्र और अंडरटेकिंग:
नए वकीलों के लिए: नामांकन (Enrolment) के समय अब एक स्टैंडअलोन शपथ पत्र (Affidavit) देना होगा कि वे डिजिटल नैतिकता का पालन करेंगे।
छात्रों और इंटर्न के लिए: हर इंटर्नशिप से पहले एक लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी कि वे केस फाइल, क्लाइंट की जानकारी या चैंबर की रणनीतियों को उजागर नहीं करेंगे।
3. AI और डीपफेक पर सख्त लगाम:
अब AI-जनरेटेड इमेज, डीपफेक वीडियो, या वॉयस क्लोनिंग के जरिए जजों या वकीलों का मजाक उड़ाना या फर्जी अदालती कार्यवाही दिखाना गंभीर 'पेशेवर कदाचार' (Professional Misconduct) माना जाएगा।
4. विज्ञापन और 'गारंटी' पर रोक (Rule 36 का कड़ाई से पालन):
"गारंटीड बेल", "एक दिन में तलाक", या "निश्चित जीत" जैसे लुभावने दावे करना सीधे तौर पर विज्ञापन और क्लाइंट को लुभाने (Solicitation) के दायरे में आता है।
यदि आप कानूनी जानकारी दे रहे हैं, तो आपको अपना नाम, स्टेट बार काउंसिल का नाम और एनरोलमेंट नंबर स्पष्ट रूप से उल्लेख करना होगा।
5. गोपनीय जानकारी की सुरक्षा:
भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) की धारा 132 के तहत क्लाइंट और वकील के बीच की बातें गोपनीय होती हैं। इंटर्न या जूनियर वकीलों द्वारा चैंबर की बातों या क्लाइंट की फाइलों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना कानूनी उल्लंघन है।
🛡️ उल्लंघन होने पर क्या होगा? (परिणाम)
यह सर्कुलर केवल निर्देश नहीं है, इसके उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई संभव है:
अनुशासनात्मक कार्रवाई: बार काउंसिल द्वारा निलंबन या नाम हटाना (Section 35, Advocates Act)।
अदालत की अवमानना: यदि सामग्री से न्यायपालिका की छवि धूमिल होती है।
आपराधिक/सिविल मामला: यदि सामग्री मानहानिपूर्ण या गोपनीयता का उल्लंघन करने वाली है।
इंटरमीडियरी एक्शन: प्लेटफॉर्म (YouTube/Instagram) को सामग्री हटाने का आदेश दिया जाएगा।
✅ क्या सोशल मीडिया इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है?
बिल्कुल नहीं! BCI ने स्पष्ट किया है कि आप निम्नलिखित काम कर सकते हैं:
संविधान, कानून और अदालती फैसलों पर निष्पक्ष अकादमिक चर्चा।
कानूनी जागरूकता (जैसे उपभोक्ता अधिकार, साइबर सुरक्षा)।
अधिवक्ताओं के लिए शैक्षणिक लेख।
ध्यान रहे: ऐसी सामग्री में 'प्रचार' की बू नहीं आनी चाहिए और वह गरिमापूर्ण होनी चाहिए।
एक विनम्र निवेदन:
अपने पेशे के प्रति अपनी निष्ठा और विश्वसनीयता को और मज़बूत करने के लिए, हम सभी सम्मानित अधिवक्ताओं से निवेदन करते हैं कि www.vakeelsahab.in पर जाकर अपनी प्रोफाइल रजिस्टर करें। आइए, हम सब मिलकर एक सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल लीगल कम्युनिटी का निर्माण करें।
अधिक जानकारी के लिए देखें: www.barcouncilofindia.org
(यह ब्लॉग पोस्ट 'वकील साहब' (www.vakeelsahab.in) द्वारा कानूनी जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है।)
लेखक / परामर्शदाता
Amardeep Jaiswal, Advocate High Court of Madhya Pradesh
यदि आप इस विषय पर अधिक जानकारी चाहते हैं या किसी कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो आप नीचे दिए गए Link के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।
Disclaimer: This article is for educational purposes only and should not be considered legal advice.
अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी कानूनी मामले के लिए कृपया उचित परामर्श लें।