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घरेलू हिंसा अधिनियम 2005: महिलाओं के अधिकार और कानूनी सुरक्षा

May 20, 2026

घरेलू हिंसा (Domestic Violence) केवल शारीरिक मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक प्रताड़ना भी शामिल है। महिलाओं को उनके ही घर में सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005' (PWDVA) लागू किया गया था।

घरेलू हिंसा में क्या-क्या शामिल है?


अक्सर लोग मानते हैं कि केवल मारपीट ही हिंसा है, लेकिन कानून के अनुसार:
शारीरिक हिंसा: मारपीट, धक्का देना या किसी भी तरह की शारीरिक चोट पहुंचाना।
मानसिक और भावनात्मक हिंसा: ताने मारना, गाली-गलौज करना, अपमानित करना या चरित्र पर लांछन लगाना।
आर्थिक हिंसा: महिला को नौकरी करने से रोकना, घर खर्च के लिए पैसे न देना, या उसकी स्त्रीधन/संपत्ति छीन लेना।

अधिनियम के तहत महिलाओं के प्रमुख अधिकार


इस कानून के तहत पीड़ित महिला को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं:
1. निवास का अधिकार (Right to Residence): महिला को उसी घर (Shared Household) में रहने का पूर्ण अधिकार है, भले ही उस घर में उसका कोई मालिकाना हक न हो। उसे जबरन घर से निकाला नहीं जा सकता।
2. संरक्षण आदेश (Protection Orders): मजिस्ट्रेट आरोपी को महिला से संपर्क करने, उसके कार्यस्थल पर जाने या किसी भी तरह से परेशान करने से रोकने का आदेश दे सकता है।
3. आर्थिक राहत (Monetary Relief): पीड़ित महिला अपने और बच्चों के भरण-पोषण, मेडिकल खर्च और अन्य नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग कर सकती है।
4. बच्चों की कस्टडी: कानूनी प्रक्रिया के दौरान बच्चों की अस्थायी कस्टडी (Temporary Custody) भी महिला को मिल सकती है ताकि उन्हें आरोपी से दूर रखा जा सके।

शिकायत कहाँ और कैसे करें?


अगर कोई महिला घरेलू हिंसा का शिकार है, तो वह कानूनी मदद के लिए कई विकल्प चुन सकती है:
• सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर FIR या शिकायत दर्ज करा सकती है।
• अपने जिले के संरक्षण अधिकारी (Protection Officer) से संपर्क कर सकती है।
• अपने अधिवक्ता (Lawyer) के माध्यम से सीधे मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन पेश कर सकती है।

निष्कर्ष:
कानून सिर्फ किताबों में रहने के लिए नहीं है, यह न्याय दिलाने का एक मजबूत हथियार है। कानूनी प्रक्रिया से हिचकिचाने के बजाय, अधिकारों का उपयोग करना ही हिंसा को रोकने का सबसे सही कदम है।

लेखक / परामर्शदाता

Amardeep Jaiswal, Advocate High Court of Madhya Pradesh

यदि आप इस विषय पर अधिक जानकारी चाहते हैं या किसी कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो आप नीचे दिए गए Link के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।

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Disclaimer: This article is for educational purposes only and should not be considered legal advice.

अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी कानूनी मामले के लिए कृपया उचित परामर्श लें।